शेयर मार्केट में नए निवेशकों का पैसा क्यों डूब जाता है?

 उत्तर तक पहुँचने के लिए एक ऐसे बच्चे की कल्पना कीजिये जिसे साइकिल चलाना सीखना है।

और आप उसके हाथ मे एक किताब " साइकिल चलाना सीखें मात्र 10 मिनट में" थमा दें।

उस किताब में लिखा है कि पहले आपको साइकिल का स्टैंड ऊपर करना है, फिर साइकिल पर बैठकर पैडल घुमाइए। साइकिल स्वतः चलने लग जाएगा।

फिर जहां आपको रोकना है तो पैर नीचे पैडल से हटाकर धीरे धीरे ब्रेक लें। यह रुक जाएगा।

इतने ज्ञान के बाद आपको पता ही है कि उस बच्चे का क्या होनेवाला है।

हाँ अगर उसी बच्चे के सामने या 10 मिनट में साइकल चलाना सीखें कि एक किताब रख दें और दूसरी ओर से कहें कि अगर मैं सिखाऊंगा तो 3-4 दिन का समय लगेगा।

तो निःसंदेह वो पहले 10 मिनट वाले को आजमाने के लिए जाएगा।

बाजार के नए निवेशकों का भी हाल कुछ ऐसे ही बच्चे की तरह होता है। जब वह बाजार में आते हैं तो उनके पास कई ऐसी किताबें और वीडियोज मिल जाता है जो कहते हैं कि बाजार में आपको समय नहीं देना, बस आप इन चीजो को फॉलो कर लें और 15 मिनट में प्रॉफिट कमाकर बाजार से बाहर।

उस 15 मिनट वाले किताब में लिखा रहता कि आपको चार्ट पर दो अलग अलग पीरियड का मूविंग एवरेज लगाना है। यदि कम पीरियड वाला ज्यादे के ऊपर निकल गया तो यह खरीदने का sign है और अगर कम पीरियड वाला लाइन ज्यादे पीरियड वाले को तोड़कर नीचे आ गया तो बिक़बाली का sign है।

बस अलग अलग किताब में ये नाम बदल जाते हैं। किसी मे मूविंग एवरेज तो किसी मे RSI तो किसी मे बोलिंजर बैंड तो किसी में कुछ और।

आखिरी में रिजल्ट उस बच्चे के जैसा ही जो जाता है।

एक बहुत पुराना कहानी दादाजी सुनाते थे कि एक जगह बहुत सारे तोते थे। उसे उसका मालिक रोजाना समझाता की शिकारी आएगा, दाना डालेगा लेकिन लोभ से उसमें फंसना नहीं। सभी तोते ने याद कर लिया और रोजाना दुहराता था लेकिन फिर भी दाना सामने देखते से दुहराते दुहराते फंस जाता था।

मुझे पूरी उम्मीद है कि आपको समझ आया होगा कि नए निवेशक बाजार में पैसे कैसे डुबोते हैं।

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