क्या स्टॉक मार्किट में इंटरडे करना सही है ?

 मैं व्यक्तिगत रूप से एक ट्रेडर, निवेशक और स्टॉक ट्रेनर हुँ। यदि आप मुझे फॉलो करते हैं और पिछले पोस्ट को पढ़ा हो तो मैं वास्तविकता लिखने में विश्वास करता हूँ। जिससे एक निवेशक गलत रास्ते जाने से बच सके।

अक्सर हमें बाजार में कुछ सलाहकार इंट्राडे ट्रेड की सलाह देते हैं तो कई ऐसे सलाहकार हैं जो लंबी अवधि के निवेश का सलाह देते हैं।

यहां तक तो सब सही रहता है। वास्तव में निवेशक के लिए मुश्किल तब बढ़ता है जब इंट्राडे के लिए सलाह देनेवाले निवेशक लंबी अवधि के निवेश को खराब बताते हैं और ठीक इसके विपरीत लंबी अवधि के निवेशक इंट्राडे को जुआ बताते हैं।

ऐसे में एक निवेशक के लिए यह निर्णय लेना कठिन हो जाता है कि वास्तव में मुझे इंट्राडे करना चाहिए या लंबी अवधि का निवेश।

आपका संदेह में जाना गलत नहीं है। आपकी जगह कोई और भी हो तो वह निश्चितरूपेन सोच में पड़ जाए।

चलिये प्रश्न के अनुसार वास्तविक पहलू को ध्यान में रखकर आगे बढ़ते हैं।

आपने एक कहावत तो सुना होगा कि "बून्द बून्द से घरा भरता है"। आपका उत्तर कहीं न कहीं इसी कहावत में छुपा हुआ है।

यहां यदि हम घरा को लंबी अवधि का निवेश मानें तो बून्द इंट्राडे रहेगा।

कुछ लोग कहेंगे कि सर् घड़ा को बून्द बून्द भरने की बजाय एक बार मे भी तो भर सकते हैं। ठीक है, आप एकबार में भी भर सकते हो लेकिन उसके लिए आपके पास अधिक मात्रा में जल चाहिए। अधिक मात्रा में जल को आप बाजार की दृष्टि में अधिक निवेश समझ सकते हैं।

लेकिन ध्यान रखने वाली बात यह है कि अधिक जल उपलब्ध होने के बाद भी यदी एक बार मे घड़े को भरने का कोशिश करें तो यह फुट सकता है। अतः अद्धिक जल होने के बाद भी घड़े को धीरे-धीरे ही भरना चाहिए। यह धीरे-धीरे अल्पकालीन निवेश है।

कुल मिलाकर यदि आप देखें तो

लंबी अवधि का निवेश= इंट्राडे+ अल्पकालीन निवेश

आज ज्यादेतर निवेशक दिग्गज राकेश झुंझुंवाला जी को फॉलो करता है। यदि आप उनके बारे में अध्ययन करें तो पाएंगे कि उनका निवेश भी शुरुआती दिनों में इंट्राडे ही था। बढ़ते फण्ड के साथ होल्डिंग की ओर प्रवृत्त हुए थे।

निष्कर्ष के रूप में हम यह कह सकते हैं कि निवेश कोई भी हो वो गलत नहीं है। सिर्फ निर्भर करता है कि आप उस निवेश को किस आधार पर और कितनी तन्मयता से लेते हैं।

उम्मीद है कि पोस्ट आपके लिए उपयोगी होगा ।

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