शेयर बाज़ार में शेयर्स को सही समय पे बेचने का निर्णय किस तरह से लिया जाता है?

Know the Best Time to Sell a Stock Online in India:

मित्र,

इस प्रश्न का उत्तर इस बात पर निर्भर करता है कि हम ट्रेडिंग करते हैं या फिर निवेश। यदि ट्रेडिंग ही करते हैं तो यह किस प्रकार का ट्रेडिंग है- स्कैल्प,इंट्राडे,BTST या फिर स्विंग।

सभी विकल्प का अपना सेटअप होता है और उसी के आधार पर हम यह तय करते हैं कि हमें शेयर में बने रहना है या फिर बेच कर निकल जाना है।

पोस्ट के माध्यम से सभी आस्पेक्ट्स को पूरी डिटेल्स में रखना संभव नहीं है लेकिन चलिये प्रयास करते हैं।

1)यदि हम स्कैल्प ट्रेडर हैं:

हम सभी बेहतर जानते हैं कि एक स्कैल्प ट्रेडर बाजार के बहुत ही छोटे मूवमेंट को ध्यान में रखकर बड़ी खरीदारी करता है। और दूसरी ओर हम यह भी बेहतर जानते हैं कि बाजार में यह छोटी मूवमेंट या छोटे up और डाउन हमेशा बना रहता है।

ऐसे में एक स्कैल्प ट्रेडर को खरीदे क्वांटिटी के अनुसार जितने पॉइंट के प्रॉफिट के लिए जा रहे हैं..उतने ही पॉइंट का स्ट्रिक्ट स्टॉप लॉस के साथ ट्रेड करना चाहिए।

हालांकि ऐसे ट्रेडर के पास पर्याप्त पैसे होते हैं। एक छोटे और रिटेल एकाउंट के लिए मेरा व्यक्तिगत मानना है कि स्कैल्प एक अच्छा विकल्प नहीं है।

2)यदि हम इंट्राडे ट्रेडर हैं:

एक इंट्राडे ट्रेडर को किसी भी ट्रेड में 1 फीसदी से ज्यादे का रिस्क लेना उचित नहीं है। ऐसे में आप रेवेरसल ट्रेड के लिए जा सकते हैं जहां आपको बहुत ही छोटा स्टॉप लॉस मिलेगा। यदि आपका ट्रेड इसके करीब का नुकसान दिखा रहा है तो उससे निकल कर किसी अन्य स्टॉक पर फोकस करना चाहिए। ऐसे यदि आप रेवेरसल ट्रेड करते हैं तो मेरा मानना है कि ज्यादेतर ट्रेड में 0.50 से अधिक का स्टॉप लॉस नहीं बनेगा।

3)यदि हम BTST ट्रेड करते हैं:

एक BTST ट्रेडर का बाजार को लेकर मानना है कि बाजार शुरुआत के 1 घंटे और आखिरी के एक घंटे में अच्छा मूव दिखाता है। और वह इस सिद्धांत को ध्यान में रखकर बाजार के आखिरी समय मे खरीदारी करते हैं। ऐसे ट्रेडर को अगले दिन बाजार शुरू के होने के बाद मैक्सिमम 1 घंटे के अंदर या 1 फीसदी के नुकसान , दोनो में से जो हो रहा हो..में बाहर हो जाना चाहिए।

4)स्विंग ट्रेड:

ऐसे ट्रेड में जाने के लिए मैं व्यक्तिगत रूप से डिलीवरी डेटा विश्लेषण का उपयोग करता हूँ। इसके अनुसार जब भी किसी स्टॉक का डिलीवरी प्रतिशत और उसका प्राइस लगातार कुछ सेशन से घट रहा हो तो मैं स्टॉक में एंटर करता हूँ।

अतः इसी सेटअप के अनुसार जब दोनों एक दूसरे के विपरीत मूव करने लग जाता है तो मैं बाहर हो जाता हूँ।

5)यदि हम लंबी अवधि के निवेशक हैं:

एक लंबी अवधि के निवेशक को ट्रेड में स्मूथ ग्रोथ के लिए कई सारी चीजों को अपनाना पड़ता है। जैसे: हेजिंग

ऐसे निवेशक को जब भी वीकली चार्ट पर गिरावट का कैंडल बने तो उन्हें वापिस स्टॉक का फंडामेंटल चेक करना चाहिए। क्या मैनेजमेंट में कुछ बदलाव हुआ है। या कंपनी से जुड़ी कोई नेगेटिव खबर है।

यदि ऐसा कुछ है और आनेवाले समय मे गिरावट देखने को मिलेगा तो वह उस वक्त हेजिंग अपना सकते हैं।

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