लोग हमेशा शेयर बाजार में निवेश की तुलना जुआ खेलने से क्यों करते है?

 एक बहुत प्रचलित लोकोक्ति है जो आपने भी सुना होगा की "मानो तो देव नहीं तो पत्थर।"

कहने में सीधा सा अर्थ है कि लोगो ने जितना समझा वो उतना ही इन्टरप्रेट कर पाए।

शेयर बाजार को लेकर भी ऐसा ही है। जिसने इसे बेहतर समझा उनके लिए ये व्यापार है। जिन्होंने इसे समझने का प्रयास नहीं किया उनके लिए यह जुआ है।

आपको एक वास्तविक निष्कर्ष तक पहुँचने के लिए एक रियल लाइफ उदाहरण से समझना चाहिए।

एक ट्रेडर के साथ हुई बातचीत को साझा करते हैं।

तो बातचीत यहां से शुरू होता है।

  • XYZ: सर् शेयर बाजार जुआ है। अब मेरा इसके ऊपर से भरोसा उठ गया।
  • मैं: आपको ऐसा लगने की वजह जान सकते हैं।
  1. XYZ: सर् मैंने स्टॉक,फ्यूचर,ऑप्शन,करेंसी, कमोडिटी,इंट्राडे,स्विंग इत्यादि सब ट्राय कर लिया लेकिन सबमें नुकसान ही हुआ।
  • हमने अच्छे से अच्छा adviser को पैसे दिए लेकिन फिर भी रिजल्ट वही रहा।
  • मैं: आपको इस बाजार में आये कितना समय हुआ है?
  • XYZ: सर् 7 महीने से हैं।
  • मैं: मात्र 7 महीने में ही आपने बाजार के लगभग सभी सेगमेंट (स्टॉक, फ्यूचर,ऑप्शन,करेंसी,कमोडिटी, इंट्राडे,स्विंग) सब ट्राय कर लिया। आप सही हैं। आप कह सकते हैं कि बाजार जुआ है और आप जुआरी।
  • XYZ: सर्, ये तो मैं समझ गया कि बाजार जुआ है। लेकिन आपने मुझे जुआरी कहा ये समझ मे नहीं आया।
  • मैं: किसी भी नए फील्ड में सही से खड़े होने में कुछ वर्ष निकल जाते हैं और आपने मात्र 7 महीने के छोटी अवधि में पूरे बाजार को आजमा लिया तो ये सिर्फ एक जुआरी ही कर सकता है। एक व्यापारी नहीं।

क्योंकि एक व्यापारी किसी एक चीज को पकड़ता है और उसी को बेहतर बनाने में समय,समझ और अनुभव लगाते हुए आगे बढ़ता है।

जिस व्यक्ति को इतना तक समझ नहीं कि सभी सेगमेंट एक जैसा ही है। जिसमें सही दिशा में बैठना प्रॉफिट तो गलत दिशा में बैठना नुकसान देगा। वो बाजार को जुआ कह सकता है।

क्योंकि तार्किक रूप से अगर सोचें तो उत्तर खुद मिल जाएगा। जैसे एक बात बताएं क्या अगर मैं स्टॉक में ट्रेड करूँ और किसी शेयर को 100 पर खरीदकर 95 पर बेचूँ तो प्रॉफिट होगा?

आप कहेंगे सम्भव ही नहीं है। अगर हमने खरीदा है तो प्रॉफिट तभी होगा जब खरीदे प्राइस से ऊपर बेचें।

चलिए ठीक है।

तो क्या यदि मैं फ्यूचर ट्रेड करूँ और किसी शेयर को 100 पर खरीदूं और 95 पर बेचूँ तो प्रॉफिट होगा?

आप कहेंगे कि अभी मैंने कहा कि अगर खरीदा है तो भाव बढ़ने पर ही प्रॉफिट होगा।

वही मैं समझाने का प्रयास कर रहा हूँ कि आप किसी भी सेगमेंट का चयन कर लें। प्रॉफिट तभी होगा जब आप सही दिशा में बैठेंगे। इसलिए प्रॉफिट के लिए दिशा मायने रखता है।

हमें ट्रेड या निवेश के दिशा पर मेहनत करनी चाहिए।

लेकिन XYZ ने बिना इतनी छोटी समझ को बढ़ाये पहले स्टॉक ट्राय किया। नुकसान हुआ तो फ्यूचर । फिर नुकसान हुआ तो ऑप्शन।

जब मेहनत ही गलत दिशा में चल रही हो तो बेहतर रिजल्ट्स का उम्मिफ करना ही बेकार है।

ऐसे में अगर हम जुआरी हैं तो बाजार जुआ है। अगर हम व्यापारी हैं तो बाजार निवेश का एक बेहतर प्लेटफार्म।

उम्मीद है आपको समुचित उत्तर मिला होगा।

Post a Comment

0 Comments