मेरा मानना है कि हमें समय वहां पर खर्च करना चाहिए जहां वास्तव में उसकी जरूरत हो। ऐसी चीजो पर समय खर्च करने का कोई अर्थ नहीं जहां इसकी जरूरत ही न हो।
ऐसे ही शेयर बाजार में भी खासकर यदि हम इंट्राडे ट्रेड करते हैं तो स्टॉक के चयन पर समय खर्च करना व्यर्थ है। आप कोई भी 2-3 स्टॉक चुने और उसमें ही जिंदगी भर ट्रेड कड़ें।
सुनने में थोड़ा अजीब लग रहा होगा लेकिन अगर तथ्य के आधार पर सोचें तो आपको उत्तर मिल जाएगा।
चलिये जब पोस्ट तक आ ही गए हैं तो दिमाग पर क्यों जोड़ देना। मैं बताता हूँ।
समझने के लिए आप बाजार में उपलब्ध हजारों की लिस्ट में से किसी भी एक स्टॉक को चुने और बताएं कि इसमें मूवमेंट की सारी पॉसिबिलिटी क्या हो सकता है?
आप कहेंगे की
1)यदि उस स्टॉक को लेकर बाजार में सेंटिमेंट्स नेगेटिव हैं तो गिरेगा।
2)यदि सेंटिमेंट्स पॉजिटिव है तो स्टॉक बढ़ेगा।
3)यदि स्ट्रेंथ न्यूट्रल है तो sideways मूव।
सही है?
ऐसा सिर्फ इसी स्टॉक को लेकर आप कहेंगे या फिर किसी भी स्टॉक को लेकर। आप कहेंगे बाजार में कोई भी स्टॉक हो सेंटिमेंट्स नेगेटिव है तो गिरेगा, सेंटिमेंट्स पॉजिटिव हो तो बढ़ेगा और सेंटिमेंट्स न्यूट्रल हो तो sideways मूव दिखेगा।
यही तो मैं भी कह रहा हूँ शुरू से की इंट्राडे के लिए कोई भी स्टॉक पकड़ लीजिये। सेंटिमेंट्स के अनुसार यही तीन मूव सम्भव है।
अब अगर सेंटिमेंट्स वीक है तो स्टॉक को आप शार्ट कर सकते हैं।
अगर सेंटिमेंट्स स्ट्रांग है तो स्टॉक को आप खरीदकर प्रॉफिट कमा सकते हैं।
और sideways बाजार तो सदा से झुलाने वाला होता है जहां रेसिस्टेन्स/सपोर्ट रेवेरसल का ट्रेड प्लान किया जाता है।
उपरोक्त सारी बातें पढ़ने के बाद मुझे उम्मीद है कि एक चीज आपका क्लियर हो गया होगा कि स्टॉक के चयन से ज्यादे महत्वपूर्ण है चुने स्टॉक का सेंटिमेंट्स समझना। इसलिये हमें स्टॉक चयन पर मेहनत करने की जगह जिस भी स्टॉक को लेकर चल रहे हैं उसके स्ट्रेंथ/कमजोरी को समझने पर मेहनत करना चाहिए।
उम्मीद है पोस्ट आपके लिए उपयोगी होगा।
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