इंट्राडे ट्रेडिंग करना मुश्किल क्यों है?

 मैंने जहाँ तक ऑब्सर्व किया है उसके अनुसार ट्रेडिंग या अनालीसिस से जुड़ी चीजें आसान है लेकिन इसे भावनात्मक उठापटक कठिन बना देता है।

जिसकी वजह से रिटेल ट्रेडर न चाहते हुए भी डर और लालच का शिकार हो जाते हैं।

ध्यान देने वाली बात है कि ये दोनों ही चीज बाजार को उस लेवल तक कठिन बना देता है जितना एक व्यक्ति सोच भी नहीं पाता है।

इस डर और लालच की वजह से व्यक्ति प्रॉफिट के कंडीशन में ट्रेडर और नुकसान की स्थिति में निवेशक बन जाते हैं। जो बड़ी नुकसान की ओर अग्रसर कर देता है।

जैसे,

एक उदाहरण से समझते हैं। मान लीजिए किसी ट्रेडर ने 500 के मूल्य पर किसी शेयर को खरीदा और विश्लेषण के आधार पर उसने टारगेट 510 निर्धारित किया और वहीं 490 का स्टॉप लॉस। सिर्फ उदाहरण के लिए।

अब खरीदने के बाद जैसे ही मूल्य बढ़ना शुरू होगा तो ट्रेडर के मन मे डर आना शुरू हो जाता है। शेयर का प्राइस 500 से बढ़कर 502 गया तो निवेशक खुश होंगे। 502 से बढ़कर 504 जैसे ही जायेगा उस ट्रेडर के मन मे डर आना शुरू हो जाता है। वह यह सोचने लगता है कि शायद जो प्रॉफिट मिल रहा है वो आगे न मिले। इस डर में जैसे मूल्य 504 से बढ़कर 505 तक जाएगा वो प्रॉफिट बुक करके बाहर हो जाएंगे।

ठीक इसके विपरीत स्थिति में यदि शेयर खरीदे मूल्य से नीचे गिरकर 495 भी आ जायेगा तो ट्रेडर ऐसा ही सोचते हैं कि अभी सिर्फ 5 रुपये गिरा है ये ऊपर आ जायेगा। शेयर निर्धारित 10 रुपये भी गिर जाए तो भी ट्रेडर यही सोच रहे होते हैं कि भाव अभी सिर्फ 10 रुपये ही तो गिरा है यह ऊपर आ जायेगा।

गौर करने वाली चीज है कि जब हम मुनाफे में चल रहे थे तो डर ने कॉन्फिडेंस तोड़ दिया। वहीं प्रॉफिट के कंडीशन में जहां कॉन्फिडेंस टूटना चाहिए वहां कॉन्फिडेंस लेवल बढ़ते रहता है।

इन्हीं सब कारकों की वजह से बाजार आसान नहीं रह जाता है। ऐसे यदि वास्तविकता की बात कहें तो बाजार का सेटअप आसान है और इसे समझना भी आसान है लेकिन सिर्फ भावनात्मक नियंत्रण बेहद जरूरी है।

उम्मीद है आपको समुचित उत्तर मिला होगा ।

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