शेयर बजसर में कई सारी चीजें हैं जिसका उपयोग बाजार में सामान्यतः नुकसान से बचने के लिए किया जाता है।
जैसे:
1)हेजिंग:
हेजिंग नुकसान से बचने का सबसे कारगर उपाय है और इसे बहुतेरे ट्रेडर और निवेशक भी उपयोग में लेते हैं। जहां एक पोजीशन के बदले विपरीत दिशा का प्रीमियम खरीदा जाता है। यह बड़ी नुकसान के समय बेहद कारगर है।
2)स्टॉप लॉस:
जोखिम को नियंत्रित करने के लिए लगभग सभी ट्रेडिंग प्लेटफार्म स्टॉप लॉस का फैसिलिटी देता है।
3)ट्रेलिंग स्टॉप लॉस:
स्टॉप लॉस आर्डर लगाना ही पर्याप्त नही है। सही समय पर उसे आगे बढ़ाते रहना भी नुकसान मैनेज करने का एक बेहतर तरीका है।
4)मार्जिन प्रेशर:
नुकसान से बचने के लिए यह एक बेहतर निर्णय है कि खुद के पैसे से ट्रेड किया जाय। मार्जिन पर मिलने वाले पैसे एक्चुअल निवेश पर एक्स्ट्रा रिस्क लेकर आता है।
5)सभी अंडे एक बास्केट में न डालकर:
ये पुरानी पद्धति है कि अपने पैसे को अलग-अलग शेयर में ट्रेड करके जोखिम को कम किया जाता है। ऐसे ट्रेड पद्धति में लोग ऐसा मानते हैं कि यदि 3-4 अलग-अलग सेक्टर में ट्रेड किया जाय और उसमें 1-2 सेक्टर खडाब प्रदर्शन करे भी तो बाकी आपको बाजार में खड़े रखेगा। जोकि सही भी है।
6)स्टॉक से विवाह न करके:
इसका तात्पर्य है कि बाजार में भावनाओ को हटाकर चलना रिस्क को मैनेज करने में सहायक होता है। इस पॉइंट के कहने का अर्थ है कि यदि आप ट्रेडर हैं तो अपने हरेक ट्रेड में ट्रेडर ही बने रहें। ऐसा नहीं कि निर्धारित नुकसान से नीचे भी बाजार जाए तो आप होल्ड करते हुए निवेशक बन जाएं।
इत्यादि
ये उपरोक्त कुछ ऐसे पॉइंट्स हैं जिन्हें ध्यान में रखकर यदि आप आगे बढ़ते हैं तो बाजार मे आपका जोखिम कम रहेगा और यदि जोखिम कम हुआ तो मुनाफा खुद व खुद बढ़ जाता है।
इसके अलावा यदि बाजार की बिना कुछ किये बाजार के रिस्क को आधा करना चाहते हैं तो बस एक छोटे से स्टेप को फॉलो करें।
1)जितना कैपिटल है उसके 70 फिसिद को ही इस्तेमाल करे।
2)बाकी इस्तेमाल होनेवाले कैपिटल को सभी खरीदे जानेवाले स्क्रिप्ट में बराबर बराबर डालें।
जैसे:
SBIN के अंदर 35 हजार लगा रहे हैं तो दूसरे खरीदे जानेवाले स्टॉक में भी उतना ही डालना है।
बस इतना करने से आप अपने कैपिटल के ऊपर बड़े रिस्क का प्रेशर कम हो जाएगा।
उपरोक्त कुछ चीजो से नुकसान को कम या बचा जा सकता है।
उम्मीद है पोस्ट आपके लिए उपयोगी होगा
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