स्विंग ट्रेडिंग और निवेश से में से कौन सा बेहतर है?

 हरेक सिक्के के दो पहलू हमेशा से रहते हैं। जिसकी वजह से विरोधाभाष बना रहता है।

उदाहरण हम स्विंग ट्रेड से ही ले लेते हैं:

स्विंग ट्रेडिंग , ट्रेडिंग कि एक ऐसी प्रक्रिया है जिसमें किसी शेयर को आगे आनेवले हप्ते दस दिन के मूवमेंट को ध्यान में रखकर खरीदा या बेचा जाता है। कई लोग यहां पर इसलिये कंफ्यूज हो सकते हैं क्योंकि उन्हें यह पता है कि जब भी किसी शेयर को एक दिन से अधिक के लिए ट्रेड करना है तो वहां सिर्फ खरीदारी वाला ऑप्शन ही एक ट्रेडर के पास होता है। लेकिन ऐसा नहीं है। हम बिकलवाली के डायरेक्शन में भी स्विंग कर सकते हैं। सिर्फ सिस्टम इक्विटी से बदलकर डेरीवेटिव की तरफ करना होगा।

अब मान लीजिए दो व्यक्ति राम और श्याम ट्रेड करने आये। दोनो ने ही विप्रो को ट्रेड के लिए चुना। अब राम का एनालिसिस कहता है है कि विप्रो आनेवले 10 दिनों में बढ़ेगा तो उसने खरीदारी के डायरेक्शन का ट्रेड ले लिया। वहीं दूसरी ओर श्याम का विश्लेषण कहता है कि विप्रो आनेवले कुछ दिनों में गिरेगा तो उसने उसका पुट ऑप्शन खरीद लिया या फिर फ्यूचर सेगेमेंट में उसे बेच दिया।

अब जाहिर सी बात है कि दोनों में से कोई एक ही प्रॉफिट में निकलेगा।

सही है?

अब राम का ट्रेड यदि सही गया तो श्याम आपको बताते मिल जाएंगे कि स्विंग ट्रेड प्रॉफिटेबल नहीं है और यदि श्याम का सही गया तो राम आपको मिल जाएंगे कहते हुए की स्विंग ट्रेड सही नहीं है।

लेकिन गौर करें तो स्विंग ट्रेड तो आने जगह पर ही है। जो सही विश्लेषण के साथ बैठा वो उसी समय मे कमा कर निकल गया और जिसका विश्लेषण गलत हो गया वो गंवा कर।

इस प्रश्न को लेकर मेरे व्यक्तिगत विचार है कि ट्रेडिंग सेगमेंट या तरीका कोई भी हो वह गलत नहीं है। फिर चाहे इंट्राडे, स्विंग,स्कैल्प या लम्बी अवधि का निवेश। ऐसा इसलिए क्योंकि सबका सिस्टम एक जैसा ही है। फ़ायदेमंद रहना इसपर कभी भी निर्भर नहीं करता है क्योंकि गलत विश्लेषण के साथ यदि हम किसी प्रकार के ट्रेड में हैं तो नुकसान होगा और यदि विश्लेषण सही रहा तो प्रॉफिट। फिर चाहे वह लंबी अवधि का निवेश हो या फिर एक दिन का ट्रेड।

उम्मीद है आपको समुचित उत्तर मिला होगा

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