शेयर बाजार में स्टॉप लॉस क्या होता है? और य़ह हमेशा शेयर के दाम से कम या ज्यादा क्यों होता है? और इसे कैसे लगाते हैं?

 नाम से ही काफी चीजे स्पष्ट हो जाता है कि स्टॉप लॉस आर्डर अर्थात नुकसान को रोकने वाला आर्डर।

अब ऐसा न समझ लें कि नुकसान का रोकने वाला आर्डर है तो इसे लगा देने से नुकसान होगा ही नही। नुकसान होगा लेकिन जहां बड़ी नुकसान की संभावना हो वहां एक फिक्स नुकसान के साथ ही यह आपको बाजार से बाहर कर देगा।

हम सभी जानते हैं कि जिस बाजार में हम या आप ट्रेड कर रहे हैं इस बाजार में कई समय ऐसा होता है जब बाजार का मूवमेंट हमारे सोचे दिशा के विपरीत में ट्रेवल करता है।

जैसे:

मान लीजिए हमने किसी स्टॉक को 1000 रुपये की कीमत पर 100 स्टॉक खरीद लिए। जाहिर सी बात है कि हमने खरीदे हैं तो ये तभी प्रॉफिट देगा जब शेयर का मूल्य 1000 से ऊपर बढ़ेगा।

लेकिन यदि हमारे खरीदने के बाद शेयर 1000 से नीचे गिरने लगा तो जितना नीचे जाएगा हमे नुकसान होगा।

अब यदि जैसा सोचे थे मूल्य वैसे बढ़ गया तो दिक्कत ही नहीं है। दिक्कत तब है जब भाव गिरने लगे जाता है। और हम सभी जानते हैं कि कोई भी स्टॉक एक दिन में अधिकतम 20 फीसदी ऊपर या फिर 20 फीसदी तक नीचे जा सकता है।

ऐसे में यदि हमने अपने खरीदे मूल्य से 1% नीचे का स्टॉप लॉस लगा दिया तो भले ही बाजार 20 फीसदी नीचे क्यों न चला जाय, हमारा ट्रेड बस 1 फिसिद के नुकसान के साथ बाहर हो जाएगा।

लेकिन यदि हमने स्टॉप लॉस आर्डर 1 फीसदी पर नहीं लगाया होता तो मुझे पूरी गिरावट के बराबर का नुकसान उठाना पड़ सकता है।

रही बात कभी चल रहे मूल्य से ऊपर स्टॉप लॉस लगाने का तो कभी चल रहे प्राइस से नीचे का तो ये हमारे ट्रेड ओर निर्भर करता है।

जैसे:

यदि हमने किसी शेयर को खरीदा है तो खरीदे मूल्य से ऊपर प्रॉफिट होगा और नीचे नुकसान तो ऐसे में खरीदे मूल्य से नीचे स्टॉप लॉस लगाया जाता है।

वहीं दूसरी ओर यदि हमने शार्ट सेल किया है तो सेल किये मूल्य के नीचे प्रॉफिट तो ऊपर नुकसान होगा। ऐसी स्थिति में स्टॉप लॉस सेल किये मूल्य के ऊपर लगाया जाता है।

आप उपरोक्त बातों और स्टॉप लॉस के महत्व को भी निम्नांकित छवि की मदद से आसानी से समझ सकते हैं।

उम्मीद है पोस्ट आपके लिए उपयोगी होगा

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