यदि विदेश निवेशक अपना सारी पूंजी भारतीय शेयर बाजार से निकाल लेती है तो क्या भारतीय शेयर बाजार खुद को संभाल नहीं पाएगा?

 दो चीजें जानना आवश्यक है।

1)इसमें कोई संदेह नहीं कि FII बाजार में सबसे अधिक पैसे लगाता है। जहां आप गौर करेंगे कि DII कैश बाजार में अधिकतम 5-6 हजार करोड़ की खरीदारी तक पहुँचता है तो दूसरी ओर FII की खरीदारी इतने से शुरू ही होता है।

2)भारतीय बाजार अब इतना कमजोर भी न रहा कि FII इसे रसातल में लेकर चला जाय।

इसे समझने के लिए आपको ज्यादे पीछे नहीं जाना पड़ेगा। आप बस जनवरी 2025 से लेकर अभी जुलाई 2025 तक के सिर्फ कैश मार्केट के आँकड़े और मूव पर ध्यान दें।

1)जनवरी 2025 में FII ने नेट 87374.66 करोड़ की सेलिंग किया तो वहीं DII ने 86591.80 करोड़ की खरीदारी किया।

2)फरवरी 2025 में FII ने नेट 58988.08 करोड़ की सेलिंग किया तो वहीं DII ने 64853.19 करोड़ की खरीदारी किया।

3)मार्च 2025 में FII ने नेट 2014.18 करोड़ की खरीदारी किया तो वहीं DII ने 37585.68 करोड़ की खरीदारी किया।

4)अप्रैल 2025 में FII ने नेट 2735.02 करोड़ की खरीदारी किया तो वहीं DII ने 28228.45 करोड़ की खरीदारी किया।

5)मई 2025 में FII ने नेट 11773.25 करोड़ की खरीदारी किया तो वहीं DII ने 67642.34 करोड़ की खरीदारी किया।

6)जून 2025 में FII ने नेट 7488.98 करोड़ की खरीदारी किया तो वहीं DII ने 72673.91 करोड़ की खरीदारी किया।

7)जुलाई 2025 में FII ने नेट 47666.68 करोड़ की बिकवाली किया तो वहीं DII ने 60939.16 करोड़ की खरीदारी किया।

ऐसे इससे ज्यादे आंकड़ें की आवश्यकता नही है। क्योंकि देशी और विदेशी में स्ट्रेंथ समझने के लिए इतना ही काफी है।

हाँ इसमें मैंने दो के आंकड़ें को आपके साथ रखा ही नहीं है। एक रिटेल और दूसरा प्रॉप। ये भी तो अपने ही दुनिया के लोग है।

भले ही FII की पूंजी बाजार में ज्यादे है लेकिन फिर भी यह कहना कि भारतीय बाजार उसकी दया दृष्टि पर टिका हुआ है तो यह पूर्णतया गलत होगा।

उम्मीद है आपको समुचित उत्तर मिला होगा।

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