शेयर बाजार के संवेदनशील होने की पीछे सबसे बड़ी वजह है कि यहां भावनाएं ट्रेड होता है। वो भी भावनाएं एक दो या दस व्यक्ति का नहीं बल्कि करोड़ो व्यक्ति का।
अब आप बेहतर जानते हैं कि हाथ की पांचों उंगली बराबर न होता है।ऐसे ही करोड़ो लोगो की भावनाएं भी एक जैसा हो यह कतई सम्भव ही नहीं है। इसी भावनाओ के हेरफेर की वजह से संवेदनशीलता और बढ़ जाता है।
जैसे एक उदाहरण से समझते हैं।
मान लीजिए निम्नांकित चार्ट XYZ के शेयर का है। जिसमें हम देख सकते हैं कि पिछले कुछ दिनों से बाजार एकही रेंज को ट्रेड कर रहा है।
अब यदि यहां से शेयर को लेकर बाजार में एक खबर आ जाये कि गवर्नमेंट ने 200 करोड़ का प्रोजेक्ट कंपनी को दिया है।
खबर सुनते ही आपके अंदर की भावनाएं हिलकोरें मारने लग जायेगा।
क्या सोचकर ?
खबर अच्छी है तो मेरे भावनाएं जैसे हिलकोरे लेना शुरू कर दिया है वैसे ही उन करोड़ो में से कम से कम लाखों के भावनाएं भी खरीदने को उत्सुक होगा।
और अगर लाखों के भावनाएं खरीदने के लिए बढ़ जाये तो शेयर रेंज तोड़कर बढ़ना शुरू हो जाएगा।
वहीं अगर किसी स्रोत से पता चले कि खबर जो मिला वो सही नहीं था।
सुनते ही उत्साहित भावनाएं सीधे शांत हो जाएगा।
जिन्होंने खरीदा वो बेचना शुरू कर देंगे। और अधिक लोगो ने बेचना शुरू कर दिया तो बढ़ा मूल्य फिर गिरावट के गोते खाना शुरू कर देगा।
यहाँ हमने क्या पाया कि बाजार तो ऐसे न्यूट्रल ही है लेकिन इसमें संवेदनाएं हमारी और आपकी भवनाएं भरता है । और हमारे और आपके अंदर भावनाएं को मैनिपुलेट करने का काम खबरें कड़ता है।
उम्मीद है आपको समुचित उत्तर मिला होगा।
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