इसमें तो कोई शंशय नहीं है कि यदि आप शेयर बाजार में आते हैं तो यह आपके जीवन को बदल सकता है।
हाँ अब यह बदलाव अर्श से फर्श तक का होगा या फिर फर्श से अर्श का..इसका निर्धारण आपके द्वारा की गई मेहनत पर निर्भर करता है।
मैंने तो शेयर बाजार को फुलटाइम कैरियर के रूप में अपनाया है और यदि कहें कि यह मेरे मुख्य आय का जरिया है तो गलत नहीं होगा।
फूल टाइम कैरियर के रूप में अपनाने के बाद का अनुभव साझा करता हूँ।
यदि सरल शब्द में शुरुआती क्षण के लिए कहुँ तो "यह आग का दरिया है और डूब के जाना है।"
वहीं समय के साथ यदि चीजें फिक्स हो जाये तो निःसंदेह यह "फूलों का सेज है।"
मैं वास्तविकता रखते आया हूँ और इसी के आधार पर वास्तविकता ही रखना चाहूंगा।
इस आग के दरिया से फूल के सेज तक का सफर बैलेंस करना वास्तव में tuff है। इस बीच मे व्यक्ति कई बार फिसलता है। कभी चोट ज्यादे तो कभी चोट कम तो कभी मरहम भी चोट की तुलना में शानदार वाला लगता है।
गेम मजेदार तो बहुत है लेकिन तब जब चोट और मरहम के बीच मे बैलेंस बना रहे और इस बैलेंसिंग में समय लगता है।
यदि आप शेयर बाजार को फूल टाइम कैरियर के रूप में लेना चाहते हैं तो कुछ चीजो को गांठ बांध कर रख लें। शुरुआत के कुछ वर्ष आपको कमाई से ध्यान हटाकर इसे पूरी शिद्दत के साथ सीखना होगा। जिसमें ट्रेड प्रैक्टिस रोजाना करें। इस ट्रेड प्रैक्टिस में कुछ चीजो का ध्यान रखें जो मैं हमेशा कहता हूं कि क्वांटिटी काफी कम रखकर चले। ये एक चीज जो मैंने बहुत गलती करने के बाद सीखा है। इतना समय के बाद आपको खुद ही लगने लगेगा कि चीजें पटरी पर आ रहा है या नहीं।
इस प्रैक्टिस के दौरान अपने एक्चुअल काम को न छोड़ें। सीधे काम को good by बोलकर बाजार में कूदना कतई सही नहीं है।
ऐसा करने पर "आप न घर का रहेंगे, न घाट का।"
साधारण शब्द में कहें तो शेयर बाजार को कैरियर के रूप में अपनाया जा सकता है लेकिन यह भी उतना ही मेहनत मांगता है जितना अन्य फील्ड। आसान समझ कर कभी भी कूदना नहीं चाहिए।
उम्मीद है आपको समुचित उत्तर मिला होगा
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