अगर बेहद सरल शब्द में कहें तो छोटे निवेशक के अग्रेसिव अप्प्रोच के कारण नुकसान उठाना पड़ता है।
अग्रेसिव अप्प्रोच की वजह से वो निम्नांकित गलतियां भरपूर कड़ते हैं।
1)Overtrading:
यह सोचकर कि बाजार बस आज भर ही चलने वाला है और जो समेटना है वो आज ही समेट कर अम्बानी वाली लाइन में खड़े हो जाएंगे।
2)बाजार से लड़ना:
यह एक छोटे निवेशक की दूसरी सबसे बड़ी गलती है। एक नुकसान होते से झपट्टा मारकर उसे कवर करने का माइंडसेट उन्हें लेकर डूब जाता है।
अब वो यह नहीं समझ पाते हैं कि कोपोषित बच्चे के जैसे निवेश राशि से खली जैसे विशालकाय निवेश वाले से टकराया नहीं जाता है बल्कि साथ या पीछे चलना ज्यादद फायदेमंद है।
3)भावनाओ के उठापटक:
छोटे प्लेयर की सबसे बड़ी दिक्कत है ये है कि उनका माइंडसेट पहले से तय नहीं रहता है कि उन्हें वर्तमान बाजार में किस डायरेक्शन को जाना है। वो बस बहती गंगा में हाथ धोने के इन्तेजार में रहते हैं। जैसे यदि ग्रीन कैंडल वाली गंगा बह रही हो तो कॉल ले लेंगे और रेड कैंडल वाली गंगा बह रही तो पुट ले लेंगे।
ये तीन मेजर कारण है। जिसकी वजह से छोटे एकाउंट बाजार में नुकसान करके बाहर हो जाते हैं। इन सभी के पीछे की वजह है कि हमने बाजार को जानने का प्रयास नहीं किया। न इसके सिस्टम को समझने के लिए प्रयास किया। हमारा बाजार में आते से सीधा हमारा फोकस पैसे के ऊपर या फिर यूं कहें कि बड़े पैसे के ओर हो जाता है।
हम यह भूल जाते हैं कि बचपन से ग्रेजुएशन तक कि गयी पढ़ाई के बदौलत भी हमारी क्वालिटी इतना डेवलप नहीं हो पाता है कि कंपनी 20-30-50 हजार की नौकरी दे दे। उसके लिए भी उतने पढ़ाई करने के बाद भी इंटर्नशिप का सहारा लेना पड़ता है।
लेकिन फिर भी बाजार में आते से सोचते हैं कि आज 10 हजार लगा दिया तो रोजाना के हजार- दो हजार अर्थात महीने भर में पैसा डबल हो जाये। कहाँ से संभव है।
कुल मिलाकर कहें तो बात माइंडसेट का है।
उम्मीद है पोस्ट आपके लिए उपयोगी होगा।
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