इसका उत्तर तो वही लोग बेहतर दे सकते हैं जिन्हें लगता है कि ट्रेडिंग लाभदायक नहीं है लेकिन फिर भी किये जा रहे हैं।
मेरे अनुसार तो यह लाभदायक है इसलिए मैं इसे किये जा रहा हूँ।
यदि थोड़ा सा तार्किक उत्तर की ओर जाऊं तो जो भी किये जा रहे हैं, वो भी जानते हैं कि यह लाभदायक है। सिर्फ नुकसान में होने की वजह से वो ऊपर से लोगो को बोलते हैं कि बाजार लाभदायक नहीं है।
अगर उन्हें भी लाभदायक न लग रहा होता तो वो रुके न होते। कब का "टाटा बाई बाई" बोलकर चल दिये होते।
अगर रुके हैं और ट्रेड किये जा रहे हैं तो इसका सीधा सा अर्थ है कि उन्हें भी लग रहा है कि बाजार लाभदायक है और गलतियां मेरे से ही हुआ है।
मैंने इस बाजार में ऐसे भी ट्रेडर ददखें हैं जो 10 दिन इक्विटी बाजार में ट्रेड करेंगे और जैसे ही नुकसान होगा तो सेगमेंट बदलकर फ्यूचर की तरफ आ जाएंगे। फ्यूचर में नुकसान हुआ तो ऑप्शन में हाथ और एकाउंट साफ करेंगे।
जब वहां भी दाल न गले तो कमोडिटी,करेंसी, इंटरनेशनल करेंसी, बिटकॉइन सब अगले 5-6 महीने में ट्राय कर लेंगे और आखिरी में शब्द होता है कि बाजार सही जगह नहीं है।
गौर करने वाली बात है कि जितने समय मे जन्म लिया बच्चा सही से बैठ न पाता है उतने समय मे ऐसे प्लेयर को सफलता चाहिए होता है।
इन सबके बाद ऐसे प्लेयर का एक मन खुद गवाही देते रहता है कि हमने नुकसान अपनी कारणों से किया है लेकिन नुकसान भी तो किये हैं तो दूसरा मन जो नेगेटिव एंगल को देखता है वो इनसे कहता है कि बाजार में प्रॉफिट नहीं कमाया जा सकता है।
जब दोनों ही मन एक दूसरे की विपरीत जा रहा हो तो इसी उलझन में ये और नए पैसे लगाए जाते हैं।
संक्षिप्त में ये अनवरत प्रक्रिया है जो आपको आज भी नजर आएगा। आज से 10 साल पहले भी नजर आता था और आज के 10 साल बाद भी देखेंगे तो यह प्रक्रिया चलने ही वाला है।
लोग नुकसान करते रहेंगे...बाजार को लाभदायक नहीं है ये भी बताते ही रहेंगे और उसके बाद भी इंट्राडे व्यापार करते ही रहेंगे।
यह चीजें खत्म तभी होगा जब वो पास से बाजार को जानने या समझने का प्रयास करेंगे।
उम्मीद है आपको समुचित उत्तर मिला होगा।
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