इंट्राडे में मूल्य कार्रवाई के आधार पर व्यापार कैसे लेते हैं?

 मूल्य कारवाई या फिर कहें तो प्राइस एक्शन। ऐसे तो इसकी कई सारी अवधारणाएं है। और यदि उन सभी पर जाने लगे तो 100 पोस्ट भी कम पड़ जाए इसलिए उत्तर तक पहुचने के लिए हम सिर्फ एक अवधारणाओं को लेकर आगे बढ़ते हैं।

प्राइस एक्शन की सबसे अहम अवधारणा है कि इतिहास खुद को रिपीट करता है। इसी अवधारणा को ध्यान में रखकर हम समझने का प्रयास करते हैं कि लोग इसके आधार पर ट्रेड कैसे लेते हैं।

उत्तर तक पहुचने के लिए इस चार्ट को देखें।

यहां हम देख सकते हैं कि बाजार एक अच्छे downtrend के साथ ट्रेड कर रहा है। जहां मूल्य जब भी बढ़ने का प्रयास करता है तो ड्रा किये लाइन को टच करके फिर से गिरना शुरू कर देता है।

अब अगर प्राइस एक्शन के इतिहास के रिपीटेसन वाले अवधारणा को देखें तो यह हमसे कहता है कि प्राइस बढ़ने के क्रम में हमारे ड्रा किये इस लाइन को हिट करता है और फिर वहां से गिरने लग जाता है।

यानी लाइन के पास प्राइस के पहुचते से सेलर ज्यादे एक्टिव हो जाते हैं।

इसी अवधारणा के आधार पर जब भी मूल्य इस लाइन के करीब पहुँचे तो वहां से इतिहास के मूव को ध्यान में रखकर एक छोटा सा रिस्क सेल साइड का लिया जा सकता है।

जिसमें स्टॉप लॉस इस लाइन से थोड़े ऊपर का लगा कर रखना चाहिए। ऐसा इसलिए क्योंकि अगर बाजार इस downtrend के रास्ते को छोड़कर उसके ऊपर निकलता है तो फिर वहां से ट्रेंड रेवेरसल की संभावना अधिक है।

उम्मीद है आपको समझ मे आया होगा कि इंट्राडे व्यापारी कैसे प्राइस एक्शन का उपयोग करते हैं।

जैसा कि मैंने पहले भी कहा कि यह सिर्फ एक अवधारणा है। ऐसी कई अवधारणाएं है लेकिन उसे एक पोस्ट में तो कई अवधारणाओं को पोस्ट के माध्यम से समझाया भी न जा सकता है।

उम्मीद है पोस्ट आपके लिए उपयोगी होगा।

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