छोटे ट्रेडर कहें या निवेशक या फिर दोनों ही तो गलत नहीं होगा क्योंकि छोटे एकाउंट के नुकसान में जाने का सबसे बड़ी दिक्कत यही है कि वो अपना रोल निर्धारित नहीं कर पाते हैं की वो निवेशक हैं या फिर ट्रेडर।
आपने सही पढा।
सिर्फ इस एक चीज को फिक्स कर देने से बहुत सी गलतियां स्वतः फिक्स हो जाएगा।
इसमें कोई शंशय नहीं है कि छोटे निवेशक प्रॉफिट के वक्त में छोटी प्रॉफिट बुक करते हैं लेकिन वहीं नुकसान की स्थिति में नुकसान लेते जाते हैं और इसी वजह से आखिरी में उनके पास कुछ नहीं बच जाता है। सिवाय अफसोस के।
इसे ऐसे समझें तो चीजें ज्यादे स्पष्ट होगा।
एक सोहन नाम का व्यक्ति था। जो सुनी सुनाई बातों के कारण बाजार से बहुत सारी अपेक्षाएं पाल कर बैठा था।
उसने ट्रेडिंग एकाउंट ओपन किया और एकाउंट में 1 लाख रुपये डाला। अब उसने सोचा कि कौन सा शेयर खरीदें तो ख्याल आया कि टाटा मोटर अच्छी कंपनी है। चारो ओर टाटा ही टाटा सुनाई और दिखाई देता है।
उसने टाटा मोटर के 90 शेयर खरीद 1100 के मूल्य पर खरीद लिया।
खरीदने के कुछ ही घण्टे बाद शेयर का मूल्य बढ़कर 1110 गया। यानी उसे कुल 900 रुपये का मुनाफा दिखा।
थोड़ी देर रुका तो देखा कि शेयर का मूल्य घटकर 1108 रुपये आ गया। अर्थात अब उसका मुनाफा 900 से घटकर मात्र 720 रुपये रह गया।
इतनी जल्दी इतना मुनाफा देखते ही ख्याल आया कि क्यों न बुक करके बाहर हो जाएं। न तो पता चले कि जो भी आ रहा है शायद वो भी न मिले।
गौर करने वाली चीज है कि जब प्रॉफिट में चल रहा था तो श्याम ट्रेडर बन गया।
अब 720 रुपये तो वह बुक कर चुका था। तभी उसने देखा कि शेयर का मूल्य फिर से 1108 रुपये से बढ़कर 1112 रुपये पहुँच गया। वो सोचने लगा कि अगर रुके रहते तो 720 की जगह 1200 का प्रॉफिट हो जाता।
फिर से वो यह सोचकर 1112 रुपये पर शेयर खरीद लेता है कि कंपनी अच्छा है तो रिटर्न्स देगा ही।
इस बार जैसे ही खरीदा की अगले कुछ घण्टे में शेयर का मूल्य गिरकर वापिस 1100 पर आ गया। वह रुका रहा कि सिर्फ 10 रुपये तो गिरा है। ये यूं बढ़कर ऊपर आ जायेगा।
थोड़ा और धैर्य रखता है। नुकसान में सोचता है कि सब कहते हैं कि धैर्य रखने वाले ही कमाते हैं। अगले घण्टे शेयर 1100 से गिरकर 1090 पहुँच जाता है।
उसका धैर्य कंटिन्यू रहता है।
सिर्फ यह सोचकर कि अभी मात्र 20 रुपये तो गिरा है। इतना तो आ ही जायेगा।
गौर करने वाली चीज है कि जो श्याम प्रॉफिट में 8 पॉइंट पर निकल गया वो नुकसान में 20 पॉइंट पर भी अडिग है। यह सोचकर कि हर जगह टाटा ही टाटा है । भाव तो बढ़ेगा ही। यानी नुकसान के क्रम में वो निवेशक बन जाता है।
जो चीजें आखिरी में उसके एकाउंट को लेकर डूब जाता है।
छोटे और बड़े प्लेयर ने एकमात्र अंतर होता है कि बड़े प्लेयर को पता होता है कि वो क्या कर रहे हैं। छोटे प्लेयर को ये पता न होता। वो सिर्फ बन रहे कैंडल के आधार पर विचार बदलते रहता है।
उम्मीद है आपको समुचित उत्तर मिला होगा।
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