जीरो सम गेम: अर्थात ऐसा गेम जिसमें एक कमाए तो दूसरा गंवाएं।
लेकिन शेयर बाजार को लेकर यह शब्दाबली बहुत हद तक सही भी है और बहुत हद तक गलत भी।
आप कहेंगे गलत है तो सही नहीं होगा और यदि सही है तो गलत नहीं होगा। लेकिन यहां दोनो ही है।
आपने सही पढ़ा।
यदि हम इसी शेयर बाजार के इक्विटी स्टॉक कैश ट्रेडिंग की बात करते हैं तो यह जीरो सम गेम नहीं है। इसमें सही अप्प्रोच से आनेवला 10 में से10 कमा कर बाहर हो सकता है।
लेकिन अगर डेरीवेटिव बाजार की बात कर रहे हैं तो यह निश्चिन्तरूपेन जीरो सम गेम है। जहां एक कमाएगा तो दूसरा गंवाएंगा।
एक सही उत्तर तक पहुँचने के लिए आपको सभी सेगमेंट की समझ बढ़ाना चाहिए।
एक रियल कहानी सुनाता हूँ। इसे अवश्य पढ़ें।
मेरे बगल में एक भैया का जनरल स्टोर है। जिसमें रोजाना के जरूरत के समान के साथ अब वो और काफी चीजें रखने लगे हैं।
मेरे अपने याद में उस भैया के दुकान के बगल में करीब 10-15 अलग-अलग व्यक्ति ने सेम उसी सारे समान का काउंटर लगाया। लेकिन वह कुछ दिन रहता और फिर बन्द कर देता। अभी भी उनके इतने बढ़िया चल रहे दुकान को देखकर अक्सर नए नए दुकानदार आते रहते हैं। लेकिन फिर भी रिजल्ट को देखकर उन्हें बन्द करना पड़ जाता है।
मैं छोटा ही था करीब 13-14 साल का रहा होऊंगा तो एक दिन पापा को हंसते हुए बोले कि मुरारी भैया भी वहां दुकान खोले और बन्द करके भाग गए।
पापा ने उस वक्त बहुत ही सुंदर बात कहा जिसे मैं आज भी हमेशा याद रखता हूँ। पापा ने कहा कि तुम्हारा उम्र अभी सिर्फ 13-14 का हुआ है और वो जो जनरल स्टोर वाले भैया हैं उनको वहां पर दुकान करते हुए करीब 30-35 साल हो गया।
30-35 साल के व्यवसाय को लोग बस 1 महीने बैठकर कम्पटीशन देना चाहते हैं। कहाँ से सफल होगा। उसमें भी वो भैया सिर्फ 30-35 साल बैठे नहीं है लगातार दुकान को समय के अनुसार भी अपडेट कड़ते गए हैं। उन्हें कमजोर करने के लिए कम से कम व्यक्ति को उतना मेहनत तो करना पड़ेगा। उतना अनुभव तो प्राप्त करना होगा।
लेकिन नहीं लोग सीधे उनके चल रहे व्यवसाय को देखकर अपना दुकान तो खोल लेता है लेकिन ये अनुभव नहीं जुटा पाता कि वह इतने साल से टिका कैसे है।
वही चीज बाजार में भी है दोस्त। यहां आनेवाले चंद दिनों के ट्रेडर को भी बनना राकेश झुनझुनवाला जी ही है लेकिन बिना अनुभव के, बिना मेहनत के ।
यही कारण है कि केवल मुठी भर लोग स्टॉक मार्केट से अच्छा पैसा कमा पाते हैं।
बाजार से रोजाना कमाने के लिए आपको बाजार का नब्ज पकड़ना होगा जोकि ऐसे सोशल मीडिया पर फैले चंद मिनट,घंटे की बताई रणनीति से सम्भव नहीं है। इसके लिए आपको बाजार को करीब से जानना होगा और यह तभी सम्भव है जब आप खुद बाजार के साथ बैठे, चाल को देखें, उसे समझने का प्रयास करें और जब एक नब्ज और दवा का सही मेल हो जाएगा कमाकर जाएंगे। धंधे पर बैठना सबसे कठिन काम है और अगर आपने यह बैठना सीख लिया तो कोई भी धंधा प्रॉफिट देकर जाएगा फिर वह शेयर बाजार ही क्यों न हो। जोकि सभी के लिए सम्भव नहीं है। क्योंकि इसके लिए व्यक्ति को शांत चित्त होकर और बिना अति-उत्साह के काम करना होगा।
हालांकि वास्तविक सलाह व्यक्ति को पसंद नहीं आता है।
उम्मीद है आपको सरल भाषा मे कही बात समझ मे आया होगा।
पोस्ट उपयोगी है तो upvote अवश्य करें।
0 Comments