सरल शब्द में कहें तो किसी भी कंपनी को खरीदते समय निम्नांकित चार चीजो को हमें देखना चाहिए।
1)कंपनी की वित्तीय स्थिति
2)मैनेजमेंट
3)सेक्टर कंपरिजन
4)कंपनी के भविष्य का प्लान(विजन)
किसी भी कंपनी के मजबूती और कमजोरी को समझने के लिए उपरोक्त 4 चीजो का विश्लेषण आवश्यक हो जाता है।
यहां प्रत्येक 4 पॉइंट में अंदर कुछ key पॉइंट्स भी हैं जिसका विश्लेषण के वक्त में हमें ध्यान देना चाहिए।
जैसे:
1)कंपनी की वित्तीय स्थिति:
इसके अंदर कंपनी के आय, डेब्ट,नगदी कैश इत्यादि पर गौर करना आवश्यक होता है। साथ मे कंपनी का रेवेन्यू ग्रोथ पर भी ध्यान देना उतना ही आवश्यक है।
2)कंपनी का मैनेजमेंट:
यह किसी भी कंपनी के रीढ़ की हड्डी की मजबूती समझने में मदद करता है कि कंपनी लम्बा चलने में समर्थ है या नहीं।
3)कंपटीटर अनालीसिस:
उस सेक्टर से जुड़े सभी स्टॉक के साथ अपनी चुनी कंपनी का पिक करना शामिल है। ताकि एक ब्रीफ आईडिया आ सके कि क्या हमारे द्वारा चुना कंपनी अपने सेक्टर में लीडर है या नहीं।
4)विजन:
इसके अंदर कंपनी के भविष्य के प्लान का विवेचना कड़ते हुए यह समझा जाता है कि क्या कंपनी growing जोन में है या इसके अंदर शिथिलता तो नहीं आ गया।
किसी भी तरह के खरीदारी से पहले उपरोक्त कुछ प्रमुख चीजो का ध्यान रखना आवश्यक है।
क्विक रिफरेन्स रेश्यो के आधार पर यदि उत्तर दें तो निम्नांकित पैरामीटर वाले स्टॉक को लंबी अवधि के लिए होल्ड किया जा सकता है।
1) ऐसी कंपनी जिसका रिटर्न्स on इक्विटी (ROE)अन्य कंपटीटर के तुलना में बेहतर हो।
2)ऐसी कंपनी जिसका अर्निंग पर शेयर (EPS) रेश्यो बेहतर हो।
3)ऐसी कंपनी जिसका फ्री कैश फ्लो(FCF) बेहतर हो।
4)ऐसी कंपनी जिसका प्रोजेक्टेड अर्निंग ग्रोथ(PEG) बेहतर लग रहा हो।
5)प्राइस to बुक(PB) रेश्यो का बेहतर होना भी एक अच्छी कंपनी का साइन है।
6)ऐसी कंपनी जो कर्ज में न हो या यदि हो तो पिछले कुछ वर्षों से लगातार कर्ज चुकता करता जा रहा हो।
7)शार्ट टर्म लिक्विडिटी के आधार पर क्विक रेश्यो बेहतर हो।
8)ऐसी कंपनी जो अपनी इन्वेंटरी को जल्दी से बेचकर रिप्लेस भी कर पाता हो। इसे सामान्यतः इन्वेंटरी टर्नओवर से समझा जा सकता है।
अब मुख्य प्रश्न आता है कि उपरोक्त बताए बातों में कैसे समझें कि एक कंपनी का रेश्यो बेहतर है या खराब है।
उसके लिए आप निम्नांकित रिफरेन्स ले सकते हैं।
1)Stock PE: सामान्यतः 25 से कम PE को बेहतर माना जाता है।
2)Stock PEG: सामान्यतः 1 से छोटे PEG बेहतर होते हैं।
3)ROCE: 20 से ऊपर के ROCE बेहतर माना जाता है।
4)ROE: 15-20 के बीच का ROE ज्यादे बेहतर है।
5)Dividend yield: ग्रोथ स्टॉक में डिविडेंड yield का कम होना सही माना जाता है। सामान्यतः यदि 2-6 के बीच मे हो तो सही कंसीडर कर सकते हैं।
6)Book value: बुक वैल्यू को undervalued या overvalued समझने के लिए किया जाता है। यदि किसी शेयर का बुक वैल्यू उसके मार्केट वैल्यू से अधिक है तो ऐसे कंपनी को undervalued की श्रेणी में रख सकते हैं।
7)Debt: कंपनी के ऊपर कर्ज। निःसंदेह कम कर्ज में बैठा कंपनी ज्यादे बेहतर होगा। हालांकि इसे मार्केट कैप के साथ भी मूल्यांकन करना आवश्यक है।
8)Debt to equity ratio: कम debt to equity वाले स्टॉक ज्यादे बेहतर होते हैं।
9)Graham: ग्राहम को भी undervalued या overvalued अवलोकन के लिए किया जाता है। यदि किसी कंपनी का ग्राहम नंबर उसके वर्तमान शेयर प्राइस के आसपास हो तो ऐसा मानते हैं कि शेयर अपने फेयर वैल्यू के आसपास ट्रेड कर रहा है।
10)Pitrosaki: 7-9 स्कोर वाले स्टॉक को ज्यादे बेहतर माना जाता है। यह एक पैरामीटर है।
11)Ind PE: इसे भी undervalued और overvalued समझने में इस्तेमाल किया जाता है। इसे हमेशा स्टॉक PE से तुलना करते हैं। यदि इंडस्ट्री PE, स्टॉक PE से अधिक है तो ऐसा मान सकते हैं कि बहुत हद तक कंपनी undervalued है।
इसके अलावा आप कंपनी परफॉरमेंस के लिए उसके साल,दो साल,तीन साल,पांच साल के सेल्स और रिटर्न्स को देख सकते हैं।
उम्मीद है पोस्ट आपके लिए उपयोगी होगा।
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