ऑपरेटर का संदर्भ ऐसे ट्रेडर से है जो अपने भारी निवेश के बलबूते किसी शेयर के प्राइस को घटा बढ़ाने की क्षमता रखते हैं और समय के साथ बढ़ाते घटाते भी हैं।

लेकिन इस प्रकार के प्लेयर अधिकांश समय खबरों में बने शेयर पर दांव लगाते हैं क्योंकि ऐसे शेयर को मैनिपुलेट करने में इन्हें अधिक मेहनत नहीं करना पड़ता है। या फिर जिसका मूल्य काफी कम हो और ये ज्यादे क्वांटिटी में शेयर उठा सके।
लेकिन कभी कभी बड़े पार्टिसिपेंट्स भी ऑपरेटर का रोल प्ले कड़ते हैं। लेकिन बड़े ऑपरेटर छोटे स्टॉक की जगह बड़े स्टॉक में प्ले करते हैं।
अगर आपको ऑपरेटर का मैनीपुलेशन देखना है तो आप आदिनाथ टेक्सटाइल के चार्ट और फंडामेंटल में देख सकते हैं।
जैसे चलिए एक उदाहरण से दिखाता हुँ।
इस शेयर के प्राइस मूवमेंट को ध्यान से देखें। शेयर का प्राइस पहले 2 रुपये के आसपास ट्रेड कर रहा था..फिर ऐसा कुछ हुआ कि ऑपरेटर ने एंट्री बनाना शुरू किया और प्राइस को बढ़ाते हुए 102 तक ले गए और फिर वहां से निकलना शुरू हो गए।
अगर कंपनी के फंडामेंटल की बात करें तो इसके सेल्स फिगर को देखकर कोई भी कह सकता है कि सिर्फ ऑपरेटर ट्रैपिंग हुआ है। क्योंकि कंपनी का पिछले 6 साल से सेल्स शून्य है। आप समझ रहे हैं मैं क्या बताना चाह रहा हूँ।
उम्मीद है आपको समुचित उत्तर मिला होगा
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