लेवरेज कब लेना चाहिए स्टॉक मार्किट में?

 एक प्रचलित लोकोक्ति है : "तेते पांव पसारिये,जेती लम्बी सौर" ।

इसका अर्थ है कि व्यक्ति को उतना ही खर्च करना चाहिए जितनी उनकी सामर्थ्य हो। अगर उससे बाहर जाकर खर्च करने का सोचेंगे तो फिर आगे तकलीफ ज्यादे आएगा।

शेयर बाजार में भी लीवरेज का भी ऐसा ही है। आप इसे सरल भाषा मे कर्ज वाला पैसा कह सकते हैं। जो हमें इनडाइरेक्ट वे में ब्रोकर उपलब्ध कराता है।

जो बाजार से पिछले कुछ वर्षों से जुड़े हैं उन्हें बेहतर पता होगा कि आज से कुछ समय पहले तक अधिकांश ब्रोकर 50 गुना तक मार्जिन की सुविधा दे रहा था। अर्थात यदि आपके पास 1 लाख रुपये हैं तो आप 50 लाख तक के ट्रेड खरीद बेच सकते हैं। सुनने में थोड़ा ज्यादे आकर्षित करता है लेकिन इसके दूरगामी परिणाम बेहद खतरनाक होते हैं।

बेहतर उत्तर तक पहुँचने के लिए इसे आप इस तरह से सोच सकते हैं।

मान लीजिए आप जिम जाते हैं और आपकी स्टेमिना 100 kg तक का वजन उठाने का है और आप 250 kg का वजन उठा लें।

कितना देर सस्टेन कर पाएंगे?

सम्भव है पहली बार में ही ये आपको लेकर बैठ जाये।

ऐसा ही लीवरेज के साथ ट्रेड करने पर होता है। एकाउंट की क्षमता 1 लाख का है और अगर उसके ऊपर 50 लाख के ट्रेड का बोझ डाल दिया जाय तो बस एक-दो गलत ट्रेड काफी है और आपका पाएंगे कि एकाउंट खाली हो गया।

एक उदाहरण से समझें।

मान लीजिए XYZ स्टॉक का मूल्य 500 रुपये है और इस शेयर में हमें 5 गुना मार्जिन मिल सकता है।

अब अगर हम 50 हजार रुपये इस शेयर में लगाने का सोच रहे हैं तो हमारे पास 2 ऑप्शन है।

1)बिना मार्जिन के खरीदारी कड़ें। ऐसे में 500 रुपये का 100 स्टॉक हम खरीद पाएंगे।

2)दूसरी ओर मार्जिन के साथ इसी स्टॉक के 500 शेयर हम खरीद सकते हैं।

हम सभी जानते हैं कि बाजार में अधिकांश स्टॉक दिन भर में 1-2-3 फीसदी का अधिकतम मूव दिखाता है। बहुत कम ऐसे स्टॉक होते हैं जो अपर सर्किट या लोवर सर्किट जैसा मूव दिखाता है, वो भी किसी कारण विशेष पर।

ऐसे में किसी स्टॉक के अंदर औसतन 1 फीसदी का लक्ष्य या रिस्क रखा जा सकता है।

प्रॉफिट के कंडिशन कि बात नहीं करेंगे क्योंकि वो तो जवाना आपको बताता ही है। बात उसकी होनी चाहिए जिसको हमसे हाईड कर दिया जाता है।

अगर हम लगातार नुकसान कड़ते रह गए तो बिना मार्जिन के एक ट्रेड में 500 रुपये का नुकसान होगा और मार्जिन वाले में 2500 रुपये का। ऐसे में बिना मार्जिन वाला ट्रेड के आपका एकाउंट खाली होने में 100 ट्रेड लगेंगे और मार्जिन वाले में एकाउंट खाली होने में 20 ट्रेड लगेंगे।

अब बाजार का नियम कहता है कि इस बाजार में हम जितना लम्बे समय बने रहेंगे हमारे प्रॉफिट में रहने की संभावना उतना अधिक बढ़ जाएगा। अगर हम चंद ट्रेड में ही एकाउंट खाली कर लें तो मनोबल,माइंड सेट सब धरा का धरा रह जायेगा।

यही हो भी रहा था। इसी को ध्यान में रखकर SEBI ने मार्जिन कम करने का सर्कुलर जारी किया था।

अभी वर्तमान में निफ़्टी 100 के आसपास के कुछ स्टॉक में सिर्फ 5 गुना के मार्जिन मिलता है।

लेकिन मेरा प्रश्न अभी भी यही है कि उसका भी उपयोग क्यों करना है। जितना पैसा है उतने से प्ले कड़ें तो भी ROI बेहतर रखा जा सकता है।

अतः प्रश्न के लिए मेरा व्यक़्क्तिगत विचार यही है कि जहां तक संभव हो अपने लगाए कैपिटल को ही काम पर लगाये । मार्जिन आपको प्रॉफिट डें सकता है लेकिन उसमें गलत ट्रेड के साथ आपके एकाउंट के उतने ही जल्दी खाली होने की संभावना है।

उम्मीद है पोस्ट आपके लिए उपयोगी होगा।

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