आपने एक कहावत तो बहुत बार सुना होगा कि "चलता हुआ आदमी और दौड़ता हुआ घोड़ा कभी बूढ़ा नहीं होता है।"
ऐसे ही निवेश का सीधा सा अर्थ है बैठे पैसे का रोटेशन और अगर यह रोटेट होते रहेगा तो समय के साथ महंगाई को मात देने में सक्षम है।
जिंदगी का सबसे सॉलिड कथन है कि "जोखिम न लेना भी सबसे बड़ा जोखिम है।"
अपने दादाजी की कहानी तो सुनाया ही था मैंने जिन्होंने 1970 ईसवी में एक जमीन 232 रुपये का खरीदा था। आज उसकी कीमत करीब 25 लाख है।
लेकिन सोचते हैं कि दादाजी अपने पैसे के ऊपर रिस्क न लेकर उसे बैंक एकाउंट में ही रख दिये होते तो आज उस रुपये से एक टाइम का दाल चावल सब्जी तो बन गया होता।
मैं ये कतई नहीं कहता कि व्यक्ति को शेयर बाजार में ही रिस्क लेना चाहिए। लेकिन रिस्क अवश्य लेना चाहिए। आप जिसमें मास्टर हैं। आप जिस चीज की समझ रखते हैं। आप उसमें भी रिस्क ले सकते हैं।
लेकिन इतना समझ कर चलना होगा कि यदि आप रिस्क नहीं भी ले रहे हैं तो ये एक रिस्क ही है जो आपको समय से पीछे धकेलते चला जायेगा और आपको पता भी नहीं लगेगा।
चलिये थोड़ा सा खुद को उस समय मे लेकर चलते हैं जब लोग पैदल चलते थे और बैलगाड़ी का अविष्कार हुआ था।
जब अविष्कार हुआ होगा तब भी कितने ने यह सोचकर उस से सफर नहीं किया होगा कि जानवर से बंधे गाड़ी का क्या भरोसा.. एक बार उसका मूड बिगड़ा लेकर गड्ढे में चला जायेगा।
लेकिन समय के साथ उसका भी जोखिम प्रबंधन किया गया। फिर साइकिल बना तो कई लोगो ने यह सोचकर रिस्क न लिया कि दो पहिये के वाहन पर रिस्क लेना सही नहीं है। जिसने इस वक्त साइकिल चलाने का रिस्क न लिया होगा वो बाकी चलाने वाले से पीछे चला गया।
ऐसे ही बाइक,कार,ट्रेन,हवाई जहाज सबके साथ हुआ।
गौर करने वाली बात है कि वास्तव में रिस्क तो सभी के साथ था। यदि बैलगाड़ी की बात करें तो वास्तव में यदि गाड़ी से बंधा जानवर यदि बिदक जाए तो फिर कुछ कंट्रोल में न रहता लेकिन इस रिस्क को भाँपते हुए उसका समुचित प्रबंधन किया गया। और आगे बढ़ा गया।
ऐसे में यदि कोई सिर्फ रिस्क को देखकर यह कहें कि शेयर बाजार में निवेश नहीं करना चाहिए तो उन्हें मैं बता दूं कि आज से ज्यादे नहीं 20 वर्ष बाद आपको भारत की कम से कम 20 फिसिद व्यक्ति शेयर बाजार में निवेश करते मिलेंगे जो अभी मात्र 3 फिसिद हैं।
इसलिये सिर्फ जोखिम को देखकर यह कहना कि व्यक्ति को शेयर बाजार में निवेश नहीं करना चाहिए..पूर्णतया गलत होगा। क्योंकि दुनिया का कोई ऐसा जोखिम नहीं है जिसका प्रबंधन नहीं किया जा सकता है। और समुचित प्रबंधन किसी भी जोखिम को 85-90 फीसदी तक कम कर सकता है।
संक्षिप्त में कहें तो निवेश आपके पैसे को समय के साथ आगे बढ़ाने का जरिया है और बढ़ती महंगाई से साथ पैसे का बढ़ना भी उतना ही आवश्यक होता है। इसलिए हमें निवेश करना चाहिए।
अब बात करते हैं आपके दूसरे प्रश्न के ऊपर की निवेश कब करें?
यह पूर्णतया आपके ऊपर है। जब भी आपको लगे कि जरूरी खर्च से आप कुछ पैसे बचा पा रहे हैं और बचे पैसे का नजदीकी समय मे कोई उपयोग नहीं है तो आप निवेश के लिए जा सकते हैं।
निवेश बहुत व्यापक क्षेत्र है। इसे सिर्फ शेयर बाजार तक सीमित न समझें। ऐसे में जिस भी क्षेत्र का आप ज्ञान रखते हैं उसी खेत्र में आगे बढ़ते जा सकते हैं।
उम्मीद है आपको समुचित उत्तर मिला होगा
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