विश्वगुरु से आपका इशारा कहीं इधर तो नहीं।
मैं आदरणीय प्रधानमंत्री जी पर कोई भी टिका-टिप्पणी नहीं करना चाहूंगा क्योंकि राजनीति मेरा विषय नहीं है और मैं उत्तर को उस दिशा में लेकर जाना भी न चाहता।
बस प्रश्न के अनुसार आपके शब्दबली को ध्यान में रखते हुए विश्वगुरु के शासनकाल और उससे से पहले से शाशन काल पर बस एक नजर दे देते हैं।
विश्वगुरु ने 2014 में शपथ लिया था और उस वक्त बाजार 6200 के आसपास ट्रेड कर रहा था और आज यह 26200 के आसपास तक ट्रेड कर चुका है।
अगर प्रतिशत में बात करें तो विश्वगुरु के शाशनकाल में बाजार ने 322% का बढ़त दिखाया है।
वहिं यदि आदरणीय मनमोहन सिंह जी कार्यकाल के देखे तो पाएंगे कि जब वो सत्तारूढ़ हुए थे तब बाजार 1425 के लेवल पर ट्रेड कर रहा था और 2014 तक बाजार ने करीब 326 फीसदी का रिटर्न्स के साथ 6200 के लेवल तक पहुँचा।
तो अगर मूवमेंट को ध्यान दें तो निःसंदेह कहीं न कहीं दोनों के कार्यकाल एक जैसा लग रहा है।
हालांकि दोनो के ही शासनकाल की स्थिति और चुनौतियां अलग अलग था। इसीलिए मैंने पहले भी कहा कि मैं उन राजनीतिक कारकों और अच्छे बुरे जैसी टिका टिप्पणी की ओर न जाना चाहता।
अभी तक आपके प्रश्न का उत्तर मिल गया होगा।
नहीं तो आगे पढ़िए।
आपका प्रश्न है कि विदेशी निवेशक भारतीय बाजार में पैसा क्यों निवेश न कर रहे हैं ?
कुछ आंकड़ों पर ध्यान दें।
1)अप्रैल 2025 में FII ने टोटल 2735.02 करोड़ का खरीदारी किया।
2)मई 2025 में FII ने टोटल 11773.25 करोड़ का खरीदारी किया।
3)जून 2025 में FII ने 7488.99 करोड़ की खरीदारी किया।
4)जुलाई 2025 में FII ने कुल 47666.68 करोड़ की बिकवाली किया।
अगर विदेशी निवेशक पैसे न लगा रहें तो फिर ये हजारों करोड़ के आंकड़े क्या है।
सही है?
जानकारी के लिए विदेशी निवेशक अपने बाजार में सबसे अधिक पैसे लगाने वाले पार्टिसिपेंट हैं।
उम्मीद है पोस्ट आपके लिए उपयोगी होगा।
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