बाजार आंखों के सामने गिर रहा होता है एक तरफा फिर भी हम बेचने के बजाय खरीद कर ही चलते हैं ऐसा क्यों ?

 इसे समझने के लिए इस पोस्ट को पूरा पढ़ें।

आपका प्रश्न सुनकर वो समय याद आ गया जब एक फण्ड मैनेजर के अंदर प्रैक्टिस कर रहे थे।

उनका नाम हर्ष था।

हमलोगों में एक बात को लेकर अच्छा खासा डिबेट अक्सर हो जाता था।

उनका कहना था कि प्रशांत एक अच्छा रिसर्चर वो है जो बाजार में खरीदने का अवसर तलाशे।

और मैं उनसे कहता था कि सर् एक अच्छा रिसर्चर वो है जो बाजार में कमाने के अवसर तलाशे। फिर वो कमाई बढ़त डायरेक्शन का हो या गिरावट डायरेक्शन का।

हालांकि इस डिबेट में मैं भी जानता था कि सर् का विचार भी सही है और वो भी बेहतर जानते थे कि मैं भी जो कह रहा हूँ वो सही है।

ठीक वैसे ही जैसे इस ग्लास को देखकर कुछ लोग कहेंगे कि यह आधा खाली है तो कुछ कहेंगे कि आधा भरा है लेकिन सही दोनो ही है।

अब बात करते हैं कि लोग बेचते क्यों हैं?

देखिये बाजार में दो तरीके के प्लेयर हमेशा उपलब्ध हैं।

1)निवेशक

2)ट्रेडर

उदाहरण के लिए DII एक अच्छा निवेशक है तो वहीं दूसरी ओर FII एक अच्छा ट्रेडर।

मैं आपको आंकड़े के साथ दिखाता हुँ।

1)अक्टूबर 2024 में FII ने नेट 114445.89 करोड़ की सेलिंग किया तो वहीं DII ने 107254.68 करोड़ की खरीदारी किया।

2)नवंबर 2024 में FII ने नेट 45974.12 करोड़ की सेलिंग किया तो वहीं DII ने 44483.46 करोड़ की खरीदारी किया।

3)दिसंबर 2024 में FII ने नेट 16982.48 करोड़ की सेलिंग किया तो वहीं DII ने 34194.13 करोड़ की खरीदारी किया।

4)जनवरी 2025 में FII ने नेट 87374.66 करोड़ की सेलिंग किया तो वहीं DII ने 86591.80 करोड़ की खरीदारी किया।

5)फरवरी 2025 में FII ने नेट 58988.08 करोड़ की सेलिंग किया तो वहीं DII ने 64853.19 करोड़ की खरीदारी किया।

6)मार्च 2025 में FII ने नेट 2014.18 करोड़ की खरीदारी किया तो वहीं DII ने 37585.68 करोड़ की खरीदारी किया।

7)अप्रैल 2025 में FII ने नेट 2735.02 करोड़ की खरीदारी किया तो वहीं DII ने 28228.45 करोड़ की खरीदारी किया।

8)मई 2025 में FII ने नेट 11773.25 करोड़ की खरीदारी किया तो वहीं DII ने 67642.34 करोड़ की खरीदारी किया।

9)जून 2025 में FII ने नेट 7488.98 करोड़ की खरीदारी किया तो वहीं DII ने 72673.91 करोड़ की खरीदारी किया।

10)जुलाई 2025 में FII ने नेट 47666.68 करोड़ की बिकवाली किया तो वहीं DII ने 60939.16 करोड़ की खरीदारी किया।

दरअसल बात रणनीति का होता है। DII की रणनीति कहता है कि लंबे समय मे बाजार ऊपर ही है तो ऐसे में हरेक सस्ते प्राइस पर शेयर उठाया जाए।

तो वहीं FII सोचता है कि गिरता बाजार में लोग जल्दी पैनिक हो जाते हैं और ऐसे में तेज बिकवाली बनने के कारण ज्यादे पैसा कमाया जा सकता है।

ये मैंने बहुत गहराई वाली बात बताया है जो शायद एक नए प्लेयर को जल्दी पल्ले न पड़े तो अब आपके प्रश्न के लिए एक सरल और संक्षिप्त उत्तर रखते हैं। ये आसानी से समझ मे आ जायेगा।

गिरावट के बाजार में एकाउंट में चल रहे नुकसान को देखकर ट्रेडर/निवेशक भयभीत हो जाता है जिसकी वजह से वो अपने पोजीशन से बाहर निकलना शुरू कर देते हैं।

उम्मीद है जानकारी आपके लिए उपयोगी होगा।

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