शेयर बाजार में किसी शेयर का उच्चतम भाव तक पहुंचने के बाद क्या होता है? बिकवाली के अलावा और क्या विकल्प है?

 किसी भी शेयर के उच्चतम भाव पर पहुँचने के बाद या फिर गिरावट के दूर में बॉटम के पास पहुँचने के बाद यह अधिकांश समय कंसोलिडेशन फेज में चला जाता है या फिर एक नया हाई बनाकर गिरना शुरू हो जाता है। अब वह नया हाई किस प्राइस तक बनेगा यह किसी भी विश्लेषक के लिए कह पाना बेहद कठिन है।

अब आगे का निर्णय उस वक्त के सेंटिमेंट्स पर निर्भर करता है कि हमें आगे बढ़ना चाहिए या फिर आगे आनेवाली गिरावट के आधार पर ट्रेड बैलेंस करना चाहिए।

अगर कंपनी फंडामेंटल आपने analyze कर लिया है और यह मौलिक रूप से मजबूत है तो भी आपको निवेश के लिए थोड़ा इन्तेजार करना चाहिए।

इसका एक प्रमुख कारण यह है कि ऐसे जोन से 100 स्टॉक में से 95 स्टॉक एक नया हाई बनाता है और फिर रिसेशन मोड़ में चला जाता है।

ये मैं इतने कॉन्फिडेंस के साथ इसलिए कह रहा हूँ क्योंकि हरेक वर्ष में एक बार मैं ऐसे 250 स्टॉक को चुनते हुए उसके आगे के मूव को बैकटेस्ट कर चुका हूं।

जिसमें मैंने पाया कि स्टॉक का फंडामेंटल मजबूत हो या नहीं लेकिन ऐसे जोन से मेजोरिटी स्टॉक्स के अंदर प्रॉफिट बुकिंग बनता है और जिसकी वजह से प्राइस नीचे ट्रेवल करने लग जाता है।

हाँ यदि 100 में से 5-10 स्टॉक के पॉजिटिव मूव को देखते हुए यदि आगे बढ़ना चाहें तो क्वांटिटी ऐड कर सकते हैं।

गौर करने वाली बात है कि बाजार में निवेश को लेकर दो बेहद प्रचलित कथन है लेकिन दोनो ही एक दूसरे के विपरीत है। जो विरोधाभाष क्रिएट कड़ता है।

1)यदि स्टॉक मौलिक रूप से मजबूत है तो उसे किसी भी मूल्य पर खरीदा जा सकता है।

2) बाजार मौलिक रूप से मजबूत स्टॉक को भी बढ़त ट्रेंड में महंगा कर देता है। जोकि गिरावट के समय हमें फेयर मूल्य पर मिल सकता है।

अब गौर करें तो दोनो ही एक दूसरे के विपरीत है। ऐसे में स्वविवेक का उपयोग करते हुए हमें खुद ही बैकटेस्ट करके निर्णय लेना चाहिए।

उम्मीद है आपको समुचित उत्तर मिला होगा।

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